टैक्स भी बचाएँ, संपत्ति भी बढ़ाएँ।
1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम लागू है और धारा 80C अब धारा 123 है। ₹1.5 लाख की सीमा वही है। हम आपकी सैलरी के हिसाब से बताते हैं कि नई या पुरानी व्यवस्था में से कौन-सी सस्ती है, और बची हुई सीमा का सही उपयोग कैसे करें।

नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था?
नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य है (वेतनभोगी के लिए ₹12.75 लाख)। धारा 123 की छूट सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में मिलती है। कई लोगों के लिए अब नई व्यवस्था सस्ती पड़ती है, इसलिए हर साल दोनों की तुलना करें।
ELSS म्यूचुअल फंड
सिर्फ़ 3 साल का लॉक-इन, कम से कम 80% इक्विटी। ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म लाभ पर 12.5% टैक्स।
PPF
15 साल, सरकार द्वारा तय ब्याज, परिपक्वता राशि टैक्स-फ़्री। स्थिरता चाहने वालों के लिए।
NPS
60 साल तक लॉक-इन; पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 की अतिरिक्त छूट। नियोक्ता का योगदान नई व्यवस्था में भी छूट योग्य।
चार कदम, कोई जल्दबाज़ी नहीं।
- अप्रैल में ही दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करें और नियोक्ता को बताएँ।
- देखें कि EPF, बीमा प्रीमियम, ट्यूशन फ़ीस और होम-लोन मूलधन से ₹1.5 लाख में से कितना पहले ही भर चुका है।
- बाकी रकम के लिए अप्रैल से मासिक SIP शुरू करें; मार्च में जल्दबाज़ी में एकमुश्त निवेश से बचें।
- सिर्फ़ टैक्स के लिए बीमा पॉलिसी न लें; सुरक्षा के लिए टर्म प्लान और निवेश अलग रखें।
टैक्स बचत पर आपके सवाल।
क्या धारा 80C ख़त्म हो गई है?
ELSS में लॉक-इन कितना है?
₹1.5 लाख निवेश से कितना टैक्स बचता है?
अगर मैं नई व्यवस्था चुनूँ तो क्या ELSS बेकार है?
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